डॉ. सम्पूर्णानन्द एवं पं. मदन मोहन मालवीय के शैक्षिक दर्शन का तुलनात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.5281/zenodo.22771564Keywords:
सम्पूर्णानन्द, मदन मोहन मालवीय, शैक्षिक दर्शन, भारतीय शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा, संस्कृत, चरित्र निर्माण, विज्ञान, संस्कृति।Abstract
भारतीय शिक्षा-दर्शन के विकास में उन शिक्षाविदों और राष्ट्रनिर्माताओं का विशेष योगदान रहा है जिन्होंने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन अथवा रोजगार प्राप्त करने का माध्यम न मानकर व्यक्ति एवं समाज के व्यापक विकास का साधन माना। पं. मदन मोहन मालवीय और डॉ. सम्पूर्णानन्द इसी परंपरा के दो महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं। दोनों का चिंतन भारतीय सांस्कृतिक परंपरा, नैतिक मूल्यों, राष्ट्रीय चेतना तथा आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के समन्वय से निर्मित हुआ, किंतु दोनों के शैक्षिक दृष्टिकोण में अपने-अपने समय, अनुभव और सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कुछ विशिष्ट भिन्नताएँ भी दिखाई देती हैं। पं. मदन मोहन मालवीय ने शिक्षा को चरित्र-निर्माण, राष्ट्रनिर्माण, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान के समन्वय का माध्यम माना। दूसरी ओर, डॉ. सम्पूर्णानन्द का शैक्षिक चिंतन भारतीय संस्कृति, संस्कृत, दर्शन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा आधुनिक सामाजिक आवश्यकताओं के समन्वय पर आधारित दिखाई देता है। इस अध्ययन में ऐतिहासिक, वर्णनात्मक एवं तुलनात्मक पद्धति के माध्यम से दोनों विचारकों के शैक्षिक दर्शन का विश्लेषण किया गया है।Downloads 22 and Views 0
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