वर्क-फ्रॉम-होम का कर्मचारियों की मानसिक सेहत पर प्रभाव

Authors

  • डॉ. राम नंदन प्रसाद सिंह वर्क-फ्रॉम-होम का कर्मचारियों की मानसिक सेहत पर प्रभाव

DOI:

https://doi.org/10.5281/zenodo.22873158

Keywords:

वर्क-फ्रॉम-होम, मानसिक स्वास्थ्य, कर्मचारी कल्याण, कार्य-जीवन संतुलन, कार्यस्थल तनाव, चिंता, बर्नआउट, सामाजिक अलगाव, नौकरी से संतुष्टि, कर्मचारी उत्पादकता, मनोवैज्ञानिक कल्याण, दूरस्थ कार्य

Abstract

यह शोध-पत्र इस बात का अध्ययन करता है कि घर से काम करने की व्यवस्था कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, चिंता, कार्य-जीवन संतुलन, भावनात्मक थकान और समग्र मनोवैज्ञानिक कल्याण को किस प्रकार प्रभावित करती है। वर्क-फ्रॉम-होम ने कर्मचारियों को कार्यस्थल की यात्रा से मुक्ति, कार्य समय में लचीलापन और परिवार के साथ अधिक समय जैसी सुविधाएँ प्रदान की हैं। दूसरी ओर, लंबे समय तक घर से काम करने के कारण सामाजिक अलगाव, कार्य और निजी जीवन के बीच सीमाओं का धुंधला होना, अत्यधिक कार्यभार, डिजिटल संचार का दबाव तथा अकेलेपन जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि वर्क-फ्रॉम-होम कर्मचारियों की मानसिक सेहत को किस सीमा तक प्रभावित करता है तथा किन परिस्थितियों में इसके सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव अधिक दिखाई देते हैं। वर्तमान समय में वर्क-फ्रॉम-होम (Work-from-Home) आधुनिक कार्य-व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। डिजिटल तकनीक, इंटरनेट और ऑनलाइन संचार माध्यमों के विकास ने कर्मचारियों को पारंपरिक कार्यालय के बजाय घर से कार्य करने की सुविधा प्रदान की है। इस कार्य-प्रणाली से कर्मचारियों को कार्य समय में लचीलापन, आवागमन के समय में कमी, परिवार के साथ अधिक समय तथा कार्यस्थल की कुछ बाधाओं से राहत जैसे अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। हालांकि, लंबे समय तक घर से कार्य करने की व्यवस्था कर्मचारियों की मानसिक सेहत पर कुछ नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकती है। कार्य और व्यक्तिगत जीवन के बीच स्पष्ट सीमाओं का समाप्त होना, अत्यधिक कार्यभार, लगातार ऑनलाइन रहने का दबाव, सामाजिक संपर्क में कमी, अकेलापन, तनाव, चिंता और भावनात्मक थकान जैसी समस्याएँ कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का मुख्य उद्देश्य वर्क-फ्रॉम-होम का कर्मचारियों की मानसिक सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करना है। इस अध्ययन में विशेष रूप से कार्य-जीवन संतुलन, तनाव, चिंता, सामाजिक अलगाव, नौकरी से संतुष्टि, उत्पादकता तथा मानसिक कल्याण जैसे प्रमुख आयामों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। अध्ययन में उपलब्ध पूर्व शोध एवं संबंधित साहित्य के आधार पर वर्क-फ्रॉम-होम के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि वर्क-फ्रॉम-होम का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव सभी कर्मचारियों के लिए समान नहीं होता, बल्कि यह कार्यभार, कार्य के घंटे, घरेलू वातावरण, सामाजिक सहयोग, संगठनात्मक सहायता और कर्मचारी की व्यक्तिगत परिस्थितियों जैसे विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है। अतः कर्मचारियों की मानसिक सेहत को बनाए रखने के लिए संगठनों द्वारा उचित कार्य-समय निर्धारण, पर्याप्त अवकाश, नियमित संवाद, सामाजिक सहयोग, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता तथा कार्य और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। एक संतुलित और कर्मचारी-केंद्रित वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था न केवल मानसिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकती है, बल्कि कर्मचारियों की कार्य-संतुष्टि, उत्पादकता और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को भी बढ़ा सकती है।

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Published

2026-09-21

How to Cite

डॉ. राम नंदन प्रसाद सिंह. (2024). वर्क-फ्रॉम-होम का कर्मचारियों की मानसिक सेहत पर प्रभाव International Journal of Management, Engineering and Social Sciences,5(1), 118-140.
https://doi.org/10.5281/zenodo.22873158

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